ब्रेकिंग
कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय में AI-मीडिया शोध केंद्र की शुरुआत, राज्यपाल डेका ने दिया पत्रकारिता का ... छत्तीसगढ़ में फिर सक्रिय होगा मानसून, 11 सितंबर से बारिश का अलर्ट; बिलासपुर में सामान्य से अधिक बारि... फ्लाइट बंद होने के बीच राहत की खबर, बिलासपुर से Fly91 भर सकती है उड़ान भिलाई में भीषण सड़क हादसा, पेड़ से टकराई तेज रफ्तार स्कॉर्पियो; दो युवकों की मौत लखनऊ में पत्रकार सुरक्षा सेवा समिति का पहला स्थापना दिवस, 17 राज्यों के पत्रकारों ने दिखाया एकजुटता ... CG News:- लूट के माल के बंटवारे पर गैंग में घमासान! मारपीट ने खोला पूरा राज, रीवा से आई पिस्टल से लू... छत्तीसगढ़ में फिर बिगड़ा मौसम, रायपुर-बिलासपुर समेत कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्य का सम्मान, छत्तीसगढ़ के 64 शिक्षकों को राज्यपाल करेंगे सम्मानित दर्दनाक सड़क हादसा, पेड़ से टकराई बाइक; दो नाबालिगों की मौके पर मौत कर्ज वसूली के नाम पर बर्बरता, महिला और बेटे को बंधक बनाकर पीटा; निर्वस्त्र कर वीडियो बनाने का आरोप
छत्तीसगढ़

4.24 करोड़ के विज्ञापन पर घमासान, भूपेश सरकार के फैसले की जांच के संकेत

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सरकारी विज्ञापनों के वितरण को लेकर मंगलवार को तीखी बहस देखने को मिली। भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में कुछ मीडिया संस्थानों को दिए गए विज्ञापनों पर सवाल उठाते हुए इसकी जानकारी मांगी। उन्होंने जानना चाहा कि वर्ष 2019-20 से 2025-26 के बीच ‘नेशनल हेराल्ड’ सहित अन्य प्रकाशनों को विज्ञापन मद से कितनी राशि जारी की गई।

सदन में जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि वर्ष 2019 से 2023-24 के दौरान ‘नेशनल हेराल्ड’ को सरकारी विज्ञापनों के रूप में कुल 4.24 करोड़ रुपये दिए गए। इसी अवधि में ‘संडे नवजीवन’ को 3.06 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय ‘नेशनल हेराल्ड’ के प्रबंधन से पवन कुमार बंसल जुड़े हुए थे।

इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने सवाल उठाया कि जब ‘नेशनल हेराल्ड’ का नियमित प्रकाशन राज्य में नहीं होता, तो फिर इतनी बड़ी राशि विज्ञापनों के रूप में किस आधार पर स्वीकृत की गई। उन्होंने पूरे मामले की विस्तार से जांच कराने की मांग की।

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार ने इन दोनों प्रकाशनों को कोई विज्ञापन जारी नहीं किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर पूरे मामले की समीक्षा कर जांच कराई जा सकती है।

सरकार की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार ‘नेशनल हेराल्ड’ को वर्ष 2019-20 में 34 लाख रुपये, 2020-21 में 58 लाख रुपये, 2021-22 में 68 लाख रुपये, 2022-23 में 1.28 करोड़ रुपये और 2023-24 में 1.36 करोड़ रुपये के विज्ञापन जारी किए गए।

मामला उठने के बाद विधानसभा में राजनीतिक माहौल गरमा गया। भाजपा सदस्यों ने इसे गंभीर विषय बताते हुए विस्तृत जांच की मांग की, जबकि सरकार ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button